बुधवार, 27 अप्रैल 2011

गर्मी आयी, गर्मी आयी

    गर्मी आयी, गर्मी आयी,
स्विमिंग पूल में मस्ती छायी.

गर्मी में जब  सूरज  तपता,
ठंडा  पानी  अच्छा  लगता.
पानी  में  हम दिन भर तैरें,
नहीं निकलने का मन करता.

मछली रानी जल में रहती,
हर दम  वहां तैरती  रहती.
कोई रोकटोक नहीं है उसको,
उसको कभी न गर्मी लगती.

आओ सभी पूल में आयें,
पानी में हम धूम मचायें.
बाल गेम पानी में खेलें,
और तैर कर मज़े मनायें.

डैडी ऊंची  जम्प लगाते,
बिठा पीठ  पर हैं  तैराते.
मुझे तैरना है अब आता,
नहीं अकेले पर हम जाते.

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूबसूरत रचना| धन्यवाद|

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  2. मजेदार कविता ....मेरे यहाँ भी गर्मी आने वाली है....

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  3. मछली रानी जल में रहती,
    हर दम वहां तैरती रहती.
    कोई रोकटोक नहीं है उसको,
    उसको कभी न गर्मी लगती.

    बहुत सुन्दर ....

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  4. आप की बहुत अच्छी प्रस्तुति. के लिए आपका बहुत बहुत आभार आपको ......... अनेकानेक शुभकामनायें.
    मेरे ब्लॉग पर आने एवं अपना बहुमूल्य कमेन्ट देने के लिए धन्यवाद , ऐसे ही आशीर्वाद देते रहें
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html

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  5. बहुत सुन्दर रचना ... गर्मी में तैरने की बात ने भी रोमांचित किया ... बच्चों की यह सुन्दर रचना ..इस के लिए आपको बधाई...

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