बुधवार, 17 अगस्त 2011

हम भारत के वीर : प्रभा तिवारी

हमें निरा बालक मत समझो,
  हम हैं भारत भूमि के वीर.

पढ़ने में ध्यान लगाते हैं,
हम खूब खेलते खाते हैं.
जब काम पर जा जुट जाते हैं,
तब हटा नहीं सकते हमको,
बिजली, ओले, आंधी और नीर.
हमें निरा बालक मत समझो,
हम हैं भारत भूमि के वीर.

मत कहो अकल के कच्चे हैं,
हम सभी शेर के बच्चे हैं.
विश्वासी, सीधे, सच्चे हैं,
अवसर पर चला दिखा देंगे
अभिमन्यु जैसे तीर.
हमें निरा बालक मत समझो,
हम हैं भारत भूमि के वीर.

आगे आगे ही बढ़ना है,
ऊँचे ऊँचे ही चढ़ना है. 
कुछ नया नया ही गढ़ना है,
सम्पूर्ण विश्व में गुरुतम होगी
भारत की तस्वीर.
हमें निरा बालक मत समझो,
हम हैं भारत भूमि के वीर.

लहर नयी फिर आयी है,
जिसने यह राह दिखायी है.
अन्ना जी से प्रेरणा पायी है,
सब मिलकर उनके साथ चलें
भ्रष्टों की बदल देवें तदवीर.
हमें निरा बालक मत समझो,
हम हैं भारत भूमि के वीर.

प्रभा तिवारी 
भोपाल.(bhajgovindam1.blogspot.com)





4 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चों में जोश पैदा करने वाली अच्छी प्रस्तुति

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  2. जोश और जज्बा पैदा करने की कोशिश करती रचना आभार

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  3. हमें निरा बालक मत समझो,
    हम हैं भारत भूमि के वीर.....बिल्कुल सही बात बच्चो को बच्चा मत समझो जी वो हर चीज़ को बदलने कि ताकात रखते हैं |
    सुन्दर रचना |

    उत्तर देंहटाएं

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