रविवार, 11 सितंबर 2011

हुआ सवेरा


हुआ सवेरा अब मत सो,
झट-पट उठो हाथ मुंह धो.

होले-होले ब्रश कर डालो,
मालिश तेल की और नहा लो.

मल-मल साबुन खूब नहाना,
फिर टॉवेल से रगड़ सुखाना.

शाला की फिर ड्रेस पहन कर,
करो नाश्ता झट से हंस कर.

जगा रही हूँ, जल्दी जागो,
आँखें खोलो, आलस त्यागो.

अब चट से उठ जाओ लाल,
कहती चूम कर उन्नत भाल.

उठ जाओ साहस करके बच्चा,
प्रात समय आलस नहीं अच्छा.


प्रभा तिवारी 
भोपाल 

13 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चों को सुन्दर सन्देश देती हुई प्यारी रचना ...........बहुत ही प्यारी लगी

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  3. अच्छी शिक्षाप्रद कविता|धन्यवाद|

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  4. सन्देश देती हुई प्यारी-प्यारी सुन्दर रचना....

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  5. Bahut hi acchhi bal-kavita... Bahut hi manoram prastuti.. Aabhar..

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