सोमवार, 5 सितंबर 2011

नन्हा शिक्षक



कल तक मैं कक्षा में पढ़ता,
आज बना लेकिन मैं टीचर.
जैसे ही मैं कक्षा में पहुंचा,
बच्चे बोले गुड़ मोर्निंग टीचर.

मैंने कहा निकालो पुस्तक,
आज पढ़ाऊंगा मैं तुमको.
ए बी सी डी लिखी बोर्ड पर,
पढ़ कर ये बतलाओ मुझको.

मेरी आज समझ में आया,
टीचर कितनी मेहनत करतीं.
बड़े प्यार से सदा पढ़ातीं,
मुझको टीचर अच्छी लगतीं.

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढ़िया।
    शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

    सादर

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  2. शानदार प्रस्तुति , आभार

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  3. अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।
    बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।।

    छात्र और शिक्षक अगर, सुधर जाएँगे आज।
    तो फिर से हो जाएगा, उन्नत देश-समाज।।
    --
    शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन करते हुए आपको शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ!

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  4. माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती ||

    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती ||

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  5. बहुत शानदार प्रस्तुति| शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. बहुत प्यारी रचना है .....शिक्षक दिवस की बधाई

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  8. sundr kavita...

    kripya mere blog par bhi aayen..
    aabhar.

    http://umeashgera.blogspot.com/

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  9. टीचर जी के परिश्रम को बच्चे मान्यता दें तो भला लगता है. आखिर इनकी भी तो बात मायने रखती है.

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  10. वास्ताव में छोटे बच्चे अपने शिक्षक से
    बहुत प्यार करते हैं और बडे होकर शिक्षक ही
    बनना चाहतें हैं।मेरी कविता उसकी यादें
    लाइट जाने की वजह से अधूरी रह गई थी
    दुबारा पढने का कष्ट करं।धन्यवाद।

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  11. bachchon se aaj nahi sadion se hum seekhte chale aa rahe hain,ye bachche hi kl ke nirmata hain.
    bachchon ke liye likhna koi aasan nahi hai.jo bachchon ke level pr pahunch jata hai wahi sahi mayane me bal sahityakar hai..aapko sadhuwad.

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