शनिवार, 17 जनवरी 2015

आसमान में यदि घर होता

आसमान में यदि घर होता,
झिलमिल तारे साथी होते।
चंदा मामा के घर जाते,
उनसे मिलके हम खुश होते।

नील गगन बन जाता आँगन,
लुका छुपी तारों से खेलते।
चंदा मामा के घर जा कर,
नानी के चरखे को देखते
      

धवल चांदनी रातों में हम
बैठ बादलों पर जब उड़ते।
साथ सितारों को लेकर के,
सारी दुनिया में हम फिरते

भूख अगर लगती जब हम को,    
चंदा मामा के घर जाते          
नानी फ़िर पकवान बनाती,        
हम सब हैं मिलकर के खाते
      

...कैलाश शर्मा 

17 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्‍दर कल्‍पना से सजी बाल कविता।

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  2. नील गगन बन जाता आँगन,
    लुका छुपी तारों से खेलते।
    चंदा मामा के घर जा कर,
    नानी के चरखे को देखते।
    बेहतरीन कविता लिखी है आपने आदरणीय श्री कैलाश शर्मा जी

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  3. सुन्दर ... मन में अनेक कल्पनाओं को जनम देता गीत ...

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  4. प्यारी बाल कविता,

    प्यारी कल्पना को मिले, सुन्दर शब्द

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  5. बालमन की उड़ान के क्या कहने ! हर पल सुखद कल्पनाओं से भरा होता है ! बहुत सुन्दर कविता !

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  6. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (19-01-2015) को ""आसमान में यदि घर होता..." (चर्चा - 1863) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. बहुत प्यारी कविता। और आसमान यदि घर में होता तो।

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  8. अहा, बहुत ही प्‍यारी कविता। मजा आ गया।

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  9. आसमान में यदि घर होता,
    झिलमिल तारे साथी होते।
    चंदा मामा के घर जाते,
    उनसे मिलके हम खुश होते।
    बहुत ही सुदर कल्पना है। बाल साहित्य लेखकों को नमन।

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  10. धवल चांदनी रातों में हम
    बैठ बादलों पर जब उड़ते।
    _____________________________ पढ़कर मन को जैसे पर लग गए ;)

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  11. कैलाश जी सर्वप्रथम तो आपकी इस रचना के लिए आपको बधाई....इस रचना में आपने बच्चों कि मनसा का बहुत ही सजग व सरलता से वर्णन किया है .....आप ऐसी ही रचनाओं को अब आप शब्दनगरी में भी प्रकाशित कर अन्य लेखकों को भी लाभान्वित कर सकतें हैं.......

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