रविवार, 9 दिसंबर 2012

बचपन को बचपन रहने दो

मत छीनो बच्चों का बचपन,
बचपन को बचपन रहने दो.
मत बोझ बढ़ाओ बस्तों का,
बच्चों का बचपन रहने दो.

बढ़ गया है बोझ किताबों का,
भागे पीछे न तितली के.
पेड़ों पर कभी न झूला झूले,
न चखे स्वाद हैं इमली के.

हो गए प्रकृति से दूर बहुत,
कार्टून जगत में रहें मस्त.
अनजान हैं छुपा छुपाई से, 
विडियो गेमों में रहें मस्त.

अनजान हैं उगते सूरज से,
हैं नहीं चांदनी में खेले.
होम वर्क मिलता इतना,
अनजान हैं क्या होते मेले.

नंबर वन बनना है अच्छा,
पर इसे दवाब न बनने दो.
बचपन है एक बार मिलता,
बचपन को बचपन रहने दो.


© कैलाश शर्मा 

21 टिप्‍पणियां:

  1. सर बालमन की पीड़ा को उजागर या अभिव्यक्त करती सुन्दर कविता |

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  2. बच्चों पर ज्यादा तारी हुआ है प्रोद्योगिकी का जादू ,कार्टून फिल्म हो या WII GAMES,या कंप्यूटर गेम्स हों या फिर धार्मिक सीरियल ,बच्चों को न खाने का रंग पता है न स्वाद ,आँखे न चिपकी होतीं है स्क्रीन पर मुंह खोल देते हैं बस .प्रासंगिक प्रस्तुति

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  3. आज तो बच्चे बचपन में ही बड़े हो जाते हैं .... सुंदर रचना

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  4. अच्छा लगा आपका यह ब्लॉग। बच्चों के लिए लिखना बच्चों सा हो जाना है।

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  5. सही लिखा, बचपन छिनता जा रहा है...कई चीजों से अनजान हैं बच्चे |

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  6. नंबर वन बनना है अच्छा,
    पर इसे दवाब न बनने दो.
    बचपन है एक बार मिलता,
    बचपन को बचपन रहने दो.
    बहुत खूब !!
    सादर !!

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  7. आज के दौर में बचपन खोता जा रहा है..
    नंबर वन बनना है अच्छा,
    पर इसे दवाब न बनने दो.
    बचपन है एक बार मिलता,
    बचपन को बचपन रहने दो.
    सही बात..अति सुन्दर रचना..:-)

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  8. बचपन तो गुम होता जा रहा है बस्तों के तले...

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  9. sirf baston hi nahi mata pita teachers ki mahatvkansha ke tale bhi bachpan mar raha hai..sundar rachna

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  10. हो गए प्रकृति से दूर बहुत,
    कार्टून जगत में रहें मस्त.
    अनजान हैं छुपा छुपाई से,
    विडियो गेमों में रहें मस्त.

    आपने शानू मेरे नाती युवराज की याद दिला दी .

    उत्तर देंहटाएं
  11. घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    । लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार के चर्चा मंच पर भी है!
    सूचनार्थ!

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  12. नंबर वन बनना है अच्छा,
    पर इसे दवाब न बनने दो.
    बचपन है एक बार मिलता,
    बचपन को बचपन रहने दो.

    यह तो हम माँ बाप को सीखना है.

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  13. बहुत सुन्दर और सही कहा है आपने !
    मेरे लेटेस्ट पोस्ट @http://kpk-vichar.blogspot.in

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  14. बच्चे इस सब चुतियापे के चलते टेन्स भी रहतें हैं हाइपर सेंसिटिव ,बात बात पे रो पड़ते हैं .स्कूल शिक्षा को बेहद तूल दिया जा रहा है .बिगडैल मम्मियां अपनी धुन और सनक में मुब्तिला हैं कई जो

    होम वर्क खुद कराती हैं बदले में घुड़क घड़क के बच्चे की जान ही ले लेतीं हैं बोले तो डराए रहतीं हैं मासूम जान को .

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  15. समस्या मूलक बाल गीत इस दौर की एक नाज़ुक समस्या की और इशारा करता है .वरणित का ही कमाल है अब बच्चे हाइपरएक्टिव और हाइपरसेंसिटिव होते जा रहें हैं लगातार .ऐसी और भी रचनाएं

    चाहिए .ऊपर से कई मम्मियों का निर्मम रवैया बच्चों की दिमागी कोशायें रोज़ नष्ट कर रहा है .

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  16. हो गए प्रकृति से दूर बहुत,
    कार्टून जगत में रहें मस्त.
    बहुत खूबसूरत रचना, सही मे बचपन को वो सब नहीं मिल पा रहा जो प्रकृति ने उसे बक्शा है

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  17. आज बच्चे प्रकृति से कोसो दूर हो गए है, सही कहा है आपने,
    टी वी कंप्यूटर के आसपास ही उनका जीवन सिमट कर रह गया है !
    बहुत सुन्दर रचना ...

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  18. वास्तविकता को दर्शाती कविता

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  19. काल चिंतन करवाती है यह रचना .समस्या मूलक बिम्ब विधान बालकों को समर्पित पोस्ट .

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