शनिवार, 16 जुलाई 2011

दर्जी और हाथी (काव्य-कथा)


एक गाँव में एक दर्जी था,
वह सब के कपड़े था सिलता.
उसी गाँव में एक हाथी था,
उस रस्ते  से रोज गुजरता.


दोनों में थी बहुत दोस्ती,
एक दूजे से बहुत प्यार था.
दर्जी उसको  केला देता,
हाथी जब नदिया जाता था.


एक दिन दर्जी गया शहर को,
अपने बेटे को काम सौंप कर.
था बेटा शैतान प्रकृति का,
प्रेम  भाव  न उसके अंदर.


हाथी आया जब दुकान पर,
उसने  अपनी  सूंड  बढ़ाई.
लडके  को  शैतानी  सूझी,
उसने  उसमें सुई  चुभाई.


दर्द हुआ हाथी को लेकिन,
उसने गुस्सा नहीं दिखाया.
जब हाथी नदिया से लौटा,
सूंड में गन्दा पानी  लाया.


हाथी जब पहुंचा दूकान पर,
उसने  पानी  वहाँ  गिराया.
कपड़े  सभी  हो गये  गन्दे,
शैतानी पर लड़का पछताया.


गर दोगे तुम दुःख दूजे को,
तो बदले में दुःख पाओगे.
बोओगे तुम बीज जिस तरह,
वैसा ही तुम फल पाओगे.

13 टिप्‍पणियां:

  1. यह कार्य सच में खूब प्रभावित कर रहा है |
    बच्चों के लिए लिखना, लगातार लिखना --
    बधाई ||

    प्रेरक - शास्त्री जी और शर्मा जी


    (1)

    आजा वापस प्यारे बचपन,

    पचपन बड़ा सताए रे |

    गठिया की पीड़ा से ज्यादा

    मन-गठिया तडपाये रे |

    भटक-भटक के अटक रहा ये-

    जिधर इसे कुछ भाये रे |

    आजा वापस प्यारे बचपन,

    पचपन बड़ा सताए रे ||1||

    (2)

    बच्चों के संग अपना जीवन,
    मस्ती भरा बिताया रे |
    रोज साथ में खेलकूद कर
    नीति-नियम सिखलाया रे |
    माता वैरी, शत्रु पिता जो
    बच्चे नहीं पढाया रे |

    तन्मयता से एक-एक को
    डिग्री बड़ी दिलाया रे ||2||
    (3)
    गये सभी परदेस कमाने

    विरह-गीत मन गाये रे |

    रूप बदल के आजा बचपन
    बाबा बहुत बुलाये रे |

    गठिया की पीड़ा से ज्यादा

    मन-गठिया तडपाये रे |

    आजा वापस प्यारे बचपन,

    पचपन बड़ा सताए रे ||3||

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  2. bahut hi sundar

    aak salah- ayhe pe vijet link rake tke hindhi may lekh sake

    vidhya

    उत्तर देंहटाएं
  3. बचपन में पढ़ी कहानी को कविता के रुप में पढ़कर बहुत अच्छा लगा...बचपन याद दिलाने के लिए धन्यवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बचपन में पढ़ी कहानी को कविता के रुप में पढ़कर बहुत अच्छा लगा| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  5. कल 18/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. कहानियों को गीत के रूप में ढालना भी एक कला है ..सुन्दर बालगीत

    उत्तर देंहटाएं
  7. काव्य कथा सुन्दर और बच्चों के लिये ग्राह्य हैं . बहुत बहुत बधाई
    http://vandana-nanhepakhi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर कविता है! आपके इस ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगता है क्यूंकि मैं अपने बचपन के दिनों को याद करती हूँ !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. हाथी और दरजी की कहानी को काव्य रूप में बेहतरीन तरीके से बुना है आपने.
    सुन्दर बाल कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस कहानी को प्राइमरी क्ष में गद्य की विधा में पढ़े थे, अब काव्य की रोचक एवं आकर्षक विधा में पढकर बहुत अलग सी विशिष्ट अनुभूति हुई. कुछ देर के लिए तो उस काशस में ही पहुच गए, पुरानी यादों में खो गए . जब मन वहाँ से हटा तो जो नवीनता आपने जोड़ी है, कथ्य की अभिवृद्धि के लिए उसकी रोचकता में खो गया, फिर तुलना करने लगा. कुल मिलाकर इस कविता ने चंचलता पैदा कर और उस काल में भ्रमण करा दिया जिसे जीवन का सर्वोत्तम काल कहा जाता है. आभार ..बहुत-बहुत आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  11. आदरणीय कैलाश चन्द्र शर्मा जी हार्दिक अभिवादन -बहुत आनंद आया आप ने हमें फिर से प्राइमरी में पहुंचा दिया बाल जीवन का मजा ही अलग है कहानी को कविता में ढाला सुन्दर कृत्य-जागरण जंक्शन में आप का साथ पा और हर्ष हुआ --धन्यवाद

    भ्रमर का दर्द और दर्पण में समर्थन के लिए आभार

    आप बच्चों के लिए हमारे ब्लॉग -बाल झरोखा सत्यम की दुनिया में भी कृपया समर्थन दें
    http://surenrashuklabhramar5satyam.blogspot.com
    -शुक्ल भ्रमर ५
    भ्रमर का झरोखा -दर्द-ए -दिल

    गर दोगे तुम दुःख दूजे को,
    तो बदले में दुःख पाओगे.
    बोओगे तुम बीज जिस तरह,
    वैसा ही तुम फल पाओगे.

    उत्तर देंहटाएं

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