मंगलवार, 5 मार्च 2013

अभ्युदय के जन्मदिन पर



               अभ्युदय के जन्म दिन पर नाना और नानी का 
                             ढेरों प्यार और आशीर्वाद 


                      खुशियाँ गौरव का अभ्युदय,
                      सूरज सम हो तेज तुम्हारा.
                      मन हो सौम्य चन्द्रमा जैसा
                      सार्थक हो यह नाम तुम्हारा.

                      जहां रहो खुशियाँ बरसाओ,
                      बनी रहे अंतस की शुचिता.
                      सद्गुण से संपन्न रहो तुम
                      पाओ गंगा जैसी पावनता.

                      बार बार दिन यह आये
                      खुशियाँ लेकर के जीवन में.
                      अभ्युदय जीवन में तेरे
                      यह आशीष सभी के मन में.
                      
                   HAPPY BIRTHDAY

                                   कैलाश शर्मा 

बुधवार, 9 जनवरी 2013

अजनबी पर विश्वास न करना (काव्य-कथा)


एक जंगल में घना पेड़ था,
उसके कोटर में तीतर रहता.
उसका कौआ ख़ास दोस्त था,
वह जुआर के खेत में रहता.

कौए से मिलने की इच्छा से,
तीतर उड़ कर गया खेत पर.
एक खरगोश ने पीछे आकर,
कब्ज़ा किया उसके कोटर पर.

जब तीतर घर आया शाम को,
कोटर में खरगोश को देखा.
तीतर बोला तुम बाहर निकलो,
नहीं जानते है यह घर मेरा?

जब होने लगी बहस दोनों में,
हुए इकट्ठे जंगल के जानवर.
बोले खरगोश से बाहर आओ,
यह तो है तीतर का ही घर.

बोला खरगोश जो घर में रहता,
उसका ही वह घर कहलाता.
मैं बैठा हूँ इस कोटर के अन्दर,
इस पर मेरा हक़ बन जाता.

सभी विचार विमर्श कर के भी
वे नहीं कोई निर्णय कर पाये.
तब सलाह दी बुज़ुर्ग हिरन ने,
निष्पक्ष व्यक्ति को ढूँढा जाये.

तीतर व खरगोश चल दिये,
किसी निष्पक्ष की तलाश में.
उनको मिली जंगली बिल्ली,
जो बैठी थी सुनसान राह में.

तुम क्या हमारा न्याय करोगी,
बिल्ली से बोले वे दोनों जाकर.
बिल्ली बोली मैं ऊँचा सुनती,
कहो बात तुम पास में आकर.

जैसे ही दोनों पास में आये,
बिल्ली झपट पडी दोनों पर.
पकड़ उन्हें अपने हाथों से,
खाया दोनों को खुश होकर.

जो साथी, हमदर्द तुम्हारे,
उनकी राय सदा ही मानो.
अजनबियों की राय हमेशा
सोच समझ कर ही मानो.

कैलाश शर्मा 

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है


हो रहा पुराना वर्ष विदा,
नव वर्ष खुशी लेकर आये.
कुछ ऐसा करना है हमको,
सारे जग में खुशियाँ छाये.

न भेद भाव मनों में हो,
सब ओर प्रेम बरसायें हम.
भूखा सोए न कोई बच्चा
थोड़ा सा उनमें बाँटें हम.

शिक्षा पर सब का हक हो,
बचपन न पिसे मशीनों में.
हैं करें कामना सभी आज,
खुशियाँ हों उनके जीवन में.

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है,
सब और नयी खुशियाँ लाना.
ऐसा न करें हम कार्य कोई,
जिससे न पड़े फिर शर्माना.

कैलाश शर्मा 

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

सेंटा क्लॉज़ का इंतज़ार है

जब क्रिसमस त्यौहार है आता, 
खुशियाँ छा जाती हैं मन में.
जगमग करता है घर सारा,
क्रिसमस ट्री सजता आँगन में.

तरह तरह के केक हैं बनते,
जिनको मिलजुल कर खाते.
रौनक रहती है घर बाहर,
मिलकर सब त्यौहार मनाते.

सेंटा क्लॉज़ का इंतज़ार है,
वे सब को उपहार हैं लाते.
मन चाहे उपहार हैं पाकर,
सब बच्चे हैं ख़ुशी मनाते.

अपनी खुशियाँ उनसे भी बाँटें,
जो गरीब असहाय हैं जग में.
जब होंगी हर चेहरे पर खुशियाँ,
तब क्रिसमस आयेगी जग में.

MERRY CHRISTMAS

कैलाश शर्मा 

रविवार, 9 दिसंबर 2012

बचपन को बचपन रहने दो

मत छीनो बच्चों का बचपन,
बचपन को बचपन रहने दो.
मत बोझ बढ़ाओ बस्तों का,
बच्चों का बचपन रहने दो.

बढ़ गया है बोझ किताबों का,
भागे पीछे न तितली के.
पेड़ों पर कभी न झूला झूले,
न चखे स्वाद हैं इमली के.

हो गए प्रकृति से दूर बहुत,
कार्टून जगत में रहें मस्त.
अनजान हैं छुपा छुपाई से, 
विडियो गेमों में रहें मस्त.

अनजान हैं उगते सूरज से,
हैं नहीं चांदनी में खेले.
होम वर्क मिलता इतना,
अनजान हैं क्या होते मेले.

नंबर वन बनना है अच्छा,
पर इसे दवाब न बनने दो.
बचपन है एक बार मिलता,
बचपन को बचपन रहने दो.


© कैलाश शर्मा 

बुधवार, 28 नवंबर 2012

तीन मछलियाँ (काव्य-कथा)


एक सरोवर था जंगल में,
उसमें तीन मछलियाँ रहतीं.
था स्वभाव अलग तीनों का,
लेकिन थी मिलकर के रहतीं.

बुद्धिमान थी पहली मछली,
दूजी मछली मगर चतुर थी.
मगर तीसरी मछली जो थी
बुद्धि से कमजोर बहुत थी.

बुद्धिमान मछली थी हर पल
चारों और नजर रखती थी.
कहाँ क्या हो रहा जंगल में
इसकी उसे खबर रहती थी.

दो मछुआरों की कुछ बातें
एक दिन उसके कान में आयीं.
कल डालेंगे जाल यहाँ पर
बहुत मछलियाँ नजर हैं आयीं.

बुद्धिमान मछली ने जाकर
दोनों मित्रों को बात बताई.
नहर जुडी तालाब से जो है
उससे भाग चलें हम भाई.

दोनों मछली हुई न राजी,
वही अकेली गयी नहर में.
अगले दिन दोनों ही मछली
मछुआरे के फंसी जाल में.

मछुआरों ने सभी मछलियाँ
खींच जाल डालीं जमीन पर.
मछली चतुर हिले डुले बिन
पडी रही चुपचाप जमीं पर.

उसे मरा समझ मछुआरे
लगे छांटने बाकी मछली को.
उछल कूद पहुँची पानी में
मछली चतुर देख मौके को.

बुद्धू मछली परेशान हो
उलटी सीधी पलट रही थी.
मछुआरों ने जब ये देखा
मार उसे शान्त कर दी थी.

बुद्दिमान मछली कुछ दिन में
फिर वापिस तालाब में आयी.
मछली चतुर हुई खुश मिलकर,
उसने उसको सब बात बताई.

बुद्धि का उपयोग न करता,
उचित सलाह जो नहीं मानता.
अपनी हानि स्वयं वह करता
और है फिर पछताना पड़ता.

कैलाश शर्मा 

सोमवार, 12 नवंबर 2012

आओ सब एक दीप जलायें

                    **दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं** 

आओ सब एक दीप जलायें,
मिलजुल कर त्यौहार मनायें.
भेद भाव के अंधियारे को 
मिलकर के हम आज भगायें.

किसी भी घर न हो अंधियारा,
एक दीप हर द्वार जलायें.
एक एक टुकड़ा मिठाई का
मिल कर साथ सभी के खायें.

फुलझडियां, अनार, पटाखे,
मिल कर के हम साथ चलायें.
लेकिन इतना ध्यान रखें हम 
पर्यावरण न दूषित हो जायें.

हर त्यौहार खुशी लाता है,
प्रेम प्रीत से सभी मनायें.
धर्म जाति का भेद भुलाके,
आओ सबको गले लगायें.

कैलाश शर्मा  
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