गहरे दोस्त लोमड़ी सारस,
रहते थे एक नदी किनारे.
कहा लोमड़ी ने सारस से,
खाने पर घर आओ हमारे.
सूट, बूट और टाई पहन कर,
सारस घर से निकला सजकर.
भूख जग गयी थी सारस की,
पहुंचा जब वो उसके घर पर.
खीर लोमड़ी लेकर आयी
एक बड़ी चौड़ी थाली में.
खीर न उसके मुंह में आती
चोंच ड़ालता जब थाली में.
भूखा सारस जब घर आया
गुस्से से वह उबल रहा था.
कैसे सबक सिखाऊँ उसको
सोच सोच वह बिखर रहा था.
कहा लोमड़ी तुम घर आना,
उसने मीठी खीर बनायी.
सारस घर जब आयी लोमड़ी,
खीर भरी थी रखी सुराही.
कोशिश बहुत लोमड़ी ने की
नहीं खीर तक वह जा पायी.
भूखी लौट चली वह घर को,
मन ही मन थी वह खिसयाई.
करो दोस्त से गर चालाकी,
सदां नतीजा उल्टा होगा.
खो दोगे तुम एक दोस्त को
और व्यर्थ शर्माना होगा.
कैलाश शर्मा
छब्बीस जनवरी आयी.
पूरे भारत ने मिलकर
गणतंत्र की खुशी मनायी.
यह धरती माँ हम सबकी
जीवन से भी प्यारी है.
इसकी मिट्टी की खुशबू
सोंधी जग से न्यारी है.
आज़ाद करने इसको
कोटिक बलिदान दिये हैं.
शत-शत प्रणाम हम सबका,
उन पूर्वज जन के लिये है.
इसकी रक्षा को हम सब
मिलकर तैयार रहेंगे.
तन जाये चाहे पन जाये
बस यह प्रण आज करेंगे.
बालक न कहो हम सब हैं
भारत भूमि के वीर.
अवसर पर चला दिखा देंगे
अभिमन्यु जैसे तीर.
! जय हिंद !
प्रभा तिवारी
भोपाल
सूरज छिपा रजाई अन्दर,
धरती धूप बिना ठिठुराती.
जाना पड़ता स्कूल ठण्ड में,
तुमको दया नहीं क्यों आती.
सुबह सुबह कोहरा होता है,
शाम ठण्ड में खेल न पाते.
जब भी तुम गायब होते हो,
बादल भी बारिस कर जाते.
मम्मा ने हम को समझाया,
मौसम आते जाते रहते.
हर मौसम का मजा है अपना,
हर मौसम हमको कुछ देते.
सर्दी बिन न गजक रेवड़ी,
और मिले न गाजर हलवा.
गर्मी अगर न आती जग में,
मिलते नहीं आम खरबूजा.
ठीक तरह से कपडे पहनो,
फिर सर्दी के मजे उड़ाओ.
हीटर के तुम पास बैठकर,
मूंगफली मस्ती से खाओ.
कैलाश शर्मा
शेर खान ने हुक्म सुनाया,
जंगल में नव वर्ष मनेगा.
सामिल होंगे सब पशु पक्षी,
नाच गान का रंग जमेगा.
जंगल में मैदान बड़ा था,
हुए इकट्ठे सब पशु पक्षी.
बिल्ली चूहा भूल दुश्मनी,
मिल कर नाचे खुशी खुशी.
भालू ने जब किया भांगड़ा,
मीठा कोयल ने गीत सुनाया.
और लोमड़ी लगी नाचने,
बन्दर डमरू ले कर के आया.
नाच मोर का सबसे अच्छा,
हाथी ने करतब दिखलाया.
भूल दुश्मनी गले मिले सब,
प्यार देख जंगल हर्षाया.
शेरखान खुश हो कर बोला,
जंगल में कितना मंगल है.
शहरों से यह जंगल अच्छा
हर रोज वहां पर तो दंगल है.
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !
कैलाश शर्मा
हैप्पी क्रिसमस है जब आता,
घर बाहर सब है सज जाता.
क्रिसमस ट्री है घर में लाते,
मिलकर उसको सभी सजाते.
सेंटा क्लॉज हैं कितने प्यारे,
लाते गिफ्ट हैं कितने सारे.
लाल कोट और लाल है टोपी,
भारी गठरी कंधे पर होती.
लम्बी सफ़ेद दाढ़ी है प्यारी,
है मुस्कान भी उनकी न्यारी.
बच्चे उनको प्यार हैं करते,
इंतज़ार उपहार का करते.
क्रिसमस खुशियाँ लेकर के आये,
सब मिलजुल कर के इसे मनायें.
MERRY CHRISTMAS
कैलाश शर्मा
जब भी मोर नाचता वन में,
खुशियाँ छा जाती हैं मन में.
पंख खोल जब नाच दिखाता,
रंग बिखर जाते हैं वन में.
नीली प्यारी लम्बी गर्दन,
उस पर बिखरे सोने के कण.
सिर पर सुन्दर ताज सजा है,
तुम्हें मानते राजा पक्षी गण.
इतने सुन्दर पंख न देखे,
जैसे चन्द्र उगे अम्बर में.
पीले, हरे रंग भी बिखरे,
इन लम्बे चमकीले पर में.
आते हैं जब काले बादल,
मोर नाचते हैं जंगल में.
कुहू कुहू आवाज गूंजती,
उत्सव आजाता जंगल में.
पढ़ते समय ध्यान से पढ़ते,
होम वर्क हम मन से करते.
तन मन में ताज़गी जगाने,
आओ चलो पार्क में खेलें.
कार्टून, टी वी कम देखें,
वीडियो गेम भी थोडा खेलें.
देखो मौसम कितना अच्छा,
आओ चलो बॉल से खेले.
खेल हैं तन मज़बूत बनाते,
प्रेम और सद्भाव जगाते.
नये नये हैं मित्र भी बनते,
जब बाहर जाकर के खेलें.