शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

होशियार चूहा

एक  था  चूहा  बड़ा  सयाना,
हाथ न बिल्ली के वह आता.
जब भी बिल्ली कोशिश करती,
किसी युक्ति से वह बच जाता. 

एक दिन बिल्ली चूहे से बोली,
कल तुम घर खाने पर आना.
चूहा बोला एक दोस्त है मेरा,
मुश्किल है उसके बिन आना.

दो दो चूहे मिल जायेंगे,
बिल्ली मन ही मन हर्षाई.
दोस्त तुम्हारे का स्वागत है,
उसको भी ले आना भाई.

लेकिन भाई बताओ इतना,
कौन दोस्त इतना पक्का है.
सबसे प्यारा दोस्त जो मेरा,
वह प्यारा सीजर कुत्ता है.

नाम सुना सीजर का उसने,
बिल्ली भागी पूरी तेजी से.
खाना खाने क्या कल आऊँ,
चूहा हँस के बोला बिल्ली से. 

17 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

    बहुत बहुत बधाई ||

    dcgpthravikar.blogspot.com

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  2. वाह बहुत सुंदर बाल कविता... शानदार प्रस्तुति सर :)

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  3. छोटी मिन्नी को मज़ा आया , जो बड़ी रश्मि में रहती है ..

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  4. बहुत सुंदर बाल कविता| धन्यवाद|

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  6. अल्ले वा! बली थुन्दल तविता है...
    मदा आ दया...
    थादल बदाई.

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  7. लेकिन भाई बताओ इतना,
    कौन दोस्त इतना पक्का है.
    सबसे प्यारा दोस्त जो मेरा,
    वह प्यारा सीजर कुत्ता है.
    शानदार प्रस्तुती।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत खूब रचना है .चूहे की चतुराई ,बिल्ली जी को रास न आई ,सीज़र स्वान था उसका भाई .

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  9. अति सुन्दर प्रस्तुति. बच्चों के लिए
    प्रेरणा दायक विचार.
    धन्यवाद.
    आनन्द विश्वास.

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  10. बहुत सुन्दर एवं प्यारी रचना ! शानदार चित्र !

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  11. बच्चे बड़े खुश रहते होंगे आपसे भाई जी !
    शुभकामनायें आपको !

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