शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

चुनमुन चिड़िया

प्यारी सी एक चुनमुन चिड़िया,
रोज फुदकती है आँगन में.
दाना चुगती, चूँ चूँ करती,
खुशियाँ भरती मेरे मन में.

प्यार बहुत करता मैं उससे,
लेकिन पास नहीं वह आती.
दाना देता अगर हाथ से,
फुर करके है वह उड़ जाती.

रोज खिलाऊंगा मैं अब दाना,
एक दिन दोस्त वो हो जायेगी.
फिर ऐसा एक दिन आयेगा,
मेरे हाथ से जब दाना खायेगी.

23 टिप्‍पणियां:

  1. चूँ चूँ करती चिड़िया कहती
    सूरज निकला चलो पकड़ने।
    ..अच्छी लगी कविता।

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  2. रवि को रविकर दे सजा, चर्चित चर्चा मंच

    चाभी लेकर बाचिये, आकर्षक की-बंच ||

    रविवार चर्चा-मंच 681

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  3. बच्चों को भाएगी यह कविता बहुत सुन्दर

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  4. कैलाश जी आप की कविता चुनमुन चिड़िया बहुत अच्छी लगी आप इसी तरह बच्चो के मन को पड़ते रहिये और मेरे ब्लॉग में आप सादर आमंत्रित है|

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  5. बहुत ही अच्हा लगता बचपन,, मेने भी एक बार एक कविता लिखी थी बचपन पर
    http://ruchichunk.blogspot.com/2011/02/bachpan.html.

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  6. बच्चों की कविता बिलकुल बच्चों वाली ज़ुबान में, आनंद आया

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  7. सुंदर मन की सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  8. प्यारी सी एक चुनमुन चिड़िया,
    रोज फुदकती है आँगन में....

    आपकी कविता अतीत की याद दिला गई....
    जब आँगन वाला घर होता था और चिड़ियों की ,
    च्चाहोटों से नींद खुलती थी ,
    होठों पर मुस्कराहट आ जाती थी.... :)

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  9. दाना चुगती, चूँ चूँ करती,
    खुशियाँ भरती मेरे मन में.
    बहुत सुन्दर.

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  10. बहुत सुन्दर और प्यारी बाल कविता ! चिड़िया की तस्वीर भी बहुत प्यारी है!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  11. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
    कल 09/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है।

    धन्यवाद!

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