शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

आजादी का ज़श्न मनायें

आज तिरंगा हम फहरायें,
आजादी का ज़श्न मनायें।

कितने हुए शहीद देश पर,
कितने फांसी पर थे लटके।
याद करें हम उन वीरों को,
हुए अमर देश पर मिट के।

नहीं समझ पाये ग़र कीमत,
इन वीरों के बलिदानों की।
व्यर्थ हमारा जीवन होगा,
लाज बचा न पाये माँ की।

हाथ पकड़ कर बढ़ो सभी का,
कहीं न कोई पीछे रह जाये।             
कुछ तक सीमित न विकास हो,
तब असली आजादी आये।

...कैलाश शर्मा 

17 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तक सीमित न विकास हो,
    तब असली आजादी आये।
    बहुत बढ़िया कैलाश जी।।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (16-08-2014) को “आजादी की वर्षगाँठ” (चर्चा अंक-1707) पर भी होगी।
    --
    हमारी स्वतन्त्रता और एकता अक्षुण्ण रहे।
    स्वतन्त्रता दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. आजादी के जश्न कि सुंदर प्रस्तुति।
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर एवं प्रेरक बाल गीत ! स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर बाल गीत ! स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  6. कल 17/अगस्त/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  7. नहीं समझ पाये ग़र कीमत,
    इन वीरों के बलिदानों की।
    व्यर्थ हमारा जीवन होगा,
    लाज बचा न पाये माँ की।

    ​सुन्दर बालगीत !

    उत्तर देंहटाएं
  8. Hi Kailash ji

    aapne bahut acchi kavita likhi hai. Main aapka blog kuch dino se padh raha hoon aur mujhe aapke post acche lage. Maine bhe kal ek naya hindi blog Dainik Blogger shuru kiya hai. Kripya padh kar apne comments ya sujhav de to mujhe accha lagega.

    Thank you
    Ayaan

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