बुधवार, 24 दिसंबर 2014

सेंटा क्लॉज़ है सबका प्यारा

क्रिसमस का त्यौहार है आता,
बच्चों को खुशियाँ है लाता।

इंतज़ार करते सब बच्चे,
लेकर के उपहार आयेगा।
सेंटा क्लॉज़ है सबका प्यारा,
वह उनसे मिलने आयेगा।

साझे हैं त्यौहार सभी के,
मिल के सबके साथ मनाओ।
भेद भाव को सभी भुला कर,
सब को अपने गले लगाओ।

क्रिसमस ट्री लगता है प्यारा,
मिलजुल कर है इसे सजाया।
आसमान उतरा ज़मीन पर,
इतना इसको है चमकाया।

बिस्किट, केक बनाए माँ ने,
चलो सभी मिलकर के खाएं।
त्यौहारों का अर्थ यही है,
मिलजुल कर हम इन्हें मनाएं।


**MERRY CHRISTMAS**

...कैलाश शर्मा 

बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

चलो सभी एक दीप जलायें

                                               (Painting by Abhyudai Tiwari)
                                          
                                    **दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें**
 
गहन अँधेरा आज छा रहा,
चलो सभी एक दीप जलायें।
कम न रोशनी घर की होगी,
ग़र प्रकाश कुटियों में लायें।
 
हर चहरे पर खुशी नहीं हो,
तो खुशियाँ हैं सदा अधूरी।
एक कोना भी जो अँधियारा,
दीपावली न हो पाये पूरी।
 
भूखे पेट, नग्न तन जो हैं,
सामिल करो उन्हें खुशियों में।
कहीं उदासी रहे न बाक़ी,
कुछ खुशियाँ दे दो कुटियों में।
 
जीवन में सबके हों खुशियाँ,
नहीं अभाव किसी घर में हो।
करो प्रयास सभी मिलजुल के,
सुख, सम्रद्धि हर घर में हो।
 
फुलझड़ियों सी हो मुस्कानें,
खुशियाँ हर जीवन में आयें।
 
...कैलाश शर्मा

शनिवार, 27 सितंबर 2014

मित्रता का फल (काव्य-कथा)

जंगल में था एक कंगारू,
साथ में बच्चे के रहता था।
अपने मृदु स्वभाव के कारण,
सभी जानवरों में वो प्रिय था।

एक दिन दौड़ रहा कंगारू,
एक पेड़ से जा टकराया।
चोट लगी थी पैर में गहरी,
कंगारू था उठ न पाया।

दर्द भरी चीख सुन कर के,
हुए इकट्ठे सभी जानवर।
देख चोट गंभीर है उसकी,
दुखी हो गए सभी जानवर।

कर के जांच था भालू बोला,
यह इलाज न मेरे बस का।
लाना होगा अब इलाज को,
हमें डॉक्टर कोई शहर का।

तब रामू खरगोश था बोला,
उसका दोस्त शहर में रहता।
सीजर कुत्ते का है मालिक
एक डॉक्टर शहर में रहता।

रामू दौड़ शहर में पहुंचा,
सीजर को उसने बतलाया।
सुनकर बात सभी सीजर ने
मालिक से उसको मिलवाया।

बहुत दयालु उसका मालिक,
उसने अपना बैग उठाया।
सीजर, बेटे, खरगोश साथ में,
वह तुरंत जंगल में आया।

देख चोट उसकी था डॉक्टर
तुरत इलाज लगा था करने।
कुछ ही पल में दवा से उसकी
कंगारू फ़िर लगा था चलने।

प्यार मोहब्बत से जो रहते,
उनके दुःख में सब साथी हैं।
कितनी भी हों बड़ी मुसीबत,
पल भर में सब मिट जाती हैं।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

शिक्षक दिवस

            **शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को सादर नमन**

बच्चे तो कच्ची मिट्टी हैं,
शिक्षक उससे मूरत गढ़ते।
नमन आज उन गुरुओं को,
मूरत में सद्गुण रंग भरते।

केवल अक्षर ज्ञान न देते,
आगे बढ़ने की राह बताते।
जीवन के इस अंधकार में,
सदा ज्ञान का दीप जलाते।

प्रेम, धैर्य, सद्गुण हों जिसमें,
वह सच्चा शिक्षक है होता।
स्नेह और मृदुता हो जिसमें,
बच्चों को है वह प्रिय होता।

शिक्षक का सम्मान जो करते,
वे सदैव उनके प्रिय बन रहते।
पूज्य हों शिक्षक जिस समाज में,
अज्ञान, अशिक्षा वहां न रहते।


...कैलाश शर्मा 

शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

आजादी का ज़श्न मनायें

आज तिरंगा हम फहरायें,
आजादी का ज़श्न मनायें।

कितने हुए शहीद देश पर,
कितने फांसी पर थे लटके।
याद करें हम उन वीरों को,
हुए अमर देश पर मिट के।

नहीं समझ पाये ग़र कीमत,
इन वीरों के बलिदानों की।
व्यर्थ हमारा जीवन होगा,
लाज बचा न पाये माँ की।

हाथ पकड़ कर बढ़ो सभी का,
कहीं न कोई पीछे रह जाये।             
कुछ तक सीमित न विकास हो,
तब असली आजादी आये।

...कैलाश शर्मा 

शनिवार, 9 अगस्त 2014

रक्षा बंधन

राखी नहीं है रेशम धागा,
इसमें कितना प्यार भरा है।
बचपन की मीठी यादों का
पूरा इक संसार भरा है।

बहन भाई का प्यारा रिश्ता,
करता है सुदृढ रक्षा बंधन।
कितने भी वे दूर हों चाहे,
आता याद प्यार का बंधन।

बंधा रहे रेशम डोरी में,
भाई बहन का प्यार सदा ही।
खुशियाँ बरसें भाई के घर में,
करे कामना बहन सदा ही।

राखी के एक एक धागे में,
निश्छल प्यार बहन का बसता।
भाई बहन का प्रेम अमर हो,
रक्षा बंधन त्यौहार है कहता।

**रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें**

....कैलाश शर्मा 

शनिवार, 26 जुलाई 2014

विहान के जन्मदिन पर

                 विहान के जन्मदिन पर नाना और नानी का 
                              ढेरों प्यार और आशीर्वाद 

चंचलता, बुद्धि का संगम,
तुम अपनी धुन के पक्के हो।
नटखटपन मन हर लेता है,
लगते तुम सबको अच्छे हो।

सदा प्यार पाओ तुम सबका,
आगे सदैव बढ़ते तुम जाओ।
कभी न कंटक राह में आयें,
हर खुशियाँ जीवन में पाओ।

हो तुम्हें मुबारक जन्म दिवस,
बार बार यह शुभ दिन आये।
मासूमियत तुम्हारी रहे बनी,
हर राह सदा मंज़िल तक जाये।

तुम करो सार्थक नाम है अपना,
नव-विहान खुशियों का लाओ।
अभ्युदय हो जीवन में खुशियाँ,
आशीष, प्यार सभी का पाओ।

...कैलाश शर्मा 
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